आगरा ग्राउंड रिपोर्टर: जितेन्द्र कुशवाह
आगरा। आगरा में ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। जिस पिता पर अपनी बेटी की सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, उसी ने अपनी 11 वर्षीय मासूम बेटी को कथित अपहरण का मोहरा बना दिया। भगवान की पोशाक का कारोबार करने वाले व्यापारी मनीष अग्रवाल ने अपने दोस्त रजत गुप्ता के साथ मिलकर 40 लाख रुपये की फिरौती मांगने की सुनियोजित साजिश रची। लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस के सामने पूरी कहानी कुछ ही दिनों में बेनकाब हो गई। घटना 10 जुलाई 2026 की है।

प्रतापनगर स्थित माधव कुंज निवासी मनीष अग्रवाल, जो भगवान की पोशाक का कारोबार करते हैं, ने थाना जगदीशपुरा पुलिस को सूचना दी कि वह शाम करीब छह बजे अपनी 11 वर्षीय बेटी को डांस क्लास छोड़कर आया था। रात करीब आठ बजे जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो घर के बाहर एक पत्र मिला। पत्र में लिखा था कि बच्ची का अपहरण कर लिया गया है और उसे सुरक्षित वापस चाहिए तो 40 लाख रुपये लेकर मोती कटरा पहुंचो। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि पुलिस को सूचना दी तो बच्ची की जान को खतरा होगा।
सूचना मिलते ही थाना जगदीशपुरा पुलिस हरकत में आ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई पुलिस टीमें बनाई गईं। आसपास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल सर्विलांस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की गई। पुलिस की कार्रवाई चल ही रही थी कि सूचना मिलने के करीब डेढ़ घंटे बाद बच्ची सकुशल अपने घर लौट आई। बेटी के घर लौटने के बाद भी पुलिस को कहानी पर संदेह बना रहा। जांच आगे बढ़ी तो सीसीटीवी फुटेज ने पूरे घटनाक्रम की परतें खोलनी शुरू कर दीं। फुटेज में सामने आया कि मनीष अग्रवाल अपनी बेटी को डांस क्लास छोड़ने गया ही नहीं था। इसके बाद पुलिस ने मनीष अग्रवाल से गहन पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि वह बेटी को सीधे नाई की मंडी निवासी अपने दोस्त रजत गुप्ता के घर छोड़कर आया था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि जैसे-जैसे पुलिस सीसीटीवी और तकनीकी जांच के जरिए सच्चाई के करीब पहुंच रही थी, मनीष अग्रवाल को पकड़े जाने का डर सताने लगा। उसने अपने दोस्त रजत गुप्ता को फोन कर बच्ची को वापस भेजने के लिए कहा। इसके बाद रजत गुप्ता बच्ची को घर के पास छोड़कर चला गया, जिससे ऐसा लगे कि अपहृत बच्ची किसी तरह वापस आ गई है। पुलिस की आगे की जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि मनीष अग्रवाल पर लाखों रुपये का कर्ज था। कर्जदाताओं के लगातार दबाव और आर्थिक परेशानी से बचने के लिए उसने अपनी ही बेटी के अपहरण और 40 लाख रुपये की फिरौती की पूरी कहानी पहले से तैयार की थी। पुलिस के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित (Pre-Planned) था, जिसमें उसके दोस्त रजत गुप्ता ने भी सहयोग किया।
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि गोपनीय जांच, सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि अपहरण और फिरौती की कहानी पूरी तरह झूठी थी। पुलिस ने मनीष अग्रवाल और रजत गुप्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है तथा दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यह मामला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि जिस पिता पर अपनी बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी ने आर्थिक संकट से निकलने के लिए अपनी मासूम बच्ची को अपनी साजिश का हिस्सा बना दिया। हालांकि, आगरा पुलिस की सतर्कता, तेज जांच और तकनीकी साक्ष्यों के दम पर पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया और कुछ ही दिनों में सच सबके सामने आ गया।