आगरा। मंगलवार रात से लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश बुधवार को बड़ा हादसा बन गई। थाना मंटोला क्षेत्र के व्यस्त सुभाष बाजार में नाले के ऊपर बने प्लेटफॉर्म पर निर्मित कई दुकानें अचानक भरभराकर गिर गईं। हादसे के समय बाजार में अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर चीख-पुकार सुनाई देने लगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एक महिला समेत चार से पांच लोगों के मलबे में दबने की आशंका जताई गई है। घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस ने घेर लिया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया सूचना मिलते ही थाना मंटोला पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। दमकल कर्मी, पुलिस और स्थानीय लोग मिलकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। मौके पर एंबुलेंस भी तैनात कर दी गईं, ताकि घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से ठीक पहले लगातार बारिश के कारण इलाके में पानी भर गया था। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज आई और नाले के ऊपर बना प्लेटफॉर्म तथा उसके ऊपर बनी दुकानें भरभराकर गिर गईं। हादसे के बाद आसपास की दुकानों में मौजूद व्यापारी और राहगीर सबसे पहले मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया। बाद में पुलिस और राहत दल ने मोर्चा संभाला। घटना के बाद एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया है। सुभाष बाजार व्यापार समिति और नाले के ऊपर बनी आठ दुकानों के दुकानदारों ने पहले ही नगर निगम को लिखित प्रार्थना पत्र देकर चेतावनी दी थी कि दुकानों और प्लेटफॉर्म में गंभीर दरारें आ चुकी हैं। उन्होंने साफ लिखा था कि बरसात के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और जनहानि की आशंका है। व्यापारियों ने नगर निगम से प्लेटफॉर्म और दुकानों के पुनर्निर्माण की मांग की थी। साथ ही यह भी कहा था कि यदि नगर निगम निर्माण नहीं करा सकता तो उन्हें स्वयं निर्माण कराने की अनुमति दी जाए।
व्यापारियों का कहना है कि कई बार शिकायत और अनुरोध के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब हादसे के बाद बाजार में यही चर्चा है कि यदि समय रहते चेतावनी पर ध्यान दिया गया होता तो शायद यह दुर्घटना टाली जा सकती थी। हालांकि, इस संबंध में नगर निगम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुभाष बाजार का यह हिस्सा हमेशा भीड़भाड़ वाला रहता है। यदि हादसा दिन के व्यस्त समय में होता तो जनहानि और भी अधिक हो सकती थी। लोगों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र में नालों के ऊपर बने पुराने निर्माणों की तत्काल तकनीकी जांच कराने और जर्जर संरचनाओं को हटाने की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्य पर है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है। घायलों और नुकसान का सही आंकड़ा रेस्क्यू पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। साथ ही हादसे के कारणों की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सुभाष बाजार का यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर गया है कि जब किसी संभावित खतरे की पहले से लिखित चेतावनी दी गई थी, तो उस पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब सभी की निगाहें रेस्क्यू अभियान और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। आगे की खबर अपडेट की जाएगी….